कुछ नाराजगी थी मुददतों से उससे बातें नहीं की थी कल उसकी आँखों से आँखें मिली पूरा साथ गुजारा वकत दोनों की आँखों में तैर गया सिवाय इसके कि हम नाराज कयों हुये थे ।।

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गरमी ——- वह दूर जहाँ कुछ दिख रहा वहाँ कभी एक बडा दरिया हुआ करता था यह जो मकानों का झुंड दिख रहा वहाँ कभी एक छोटा जंगल हुआ करता था हर रोज सुन रहे साजों में सजे गाने जहाँ वहीं पर कभी एक कोयल बगैर साजों के गाया करती थी कभी बचपन में मैं…Continue Reading

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उम्मीद ——- सूरज भी वही है शहर भी वही है सूरज के निकलने और डूबने का रंग ढंग भी वही है शहर की लम्बी लम्बी सडकों पर आसपास के होटलों और बड़े बड़े मकानों पर सूरज की रौशनी में बन रहीं परछाइयाँ भी वहीं हैं जाने पहचाने परिचित अपरिचित लोगों के समूह भी वैसे ही…Continue Reading

मत बता मुझे मंदिर और मस्जिद के रसूख़ की कहानी मैं एक मज़दूर हूँ इन हाथों ने पता नहीं कितने अल्लाह के ठिकाने बनाये होगे ।।

मत बता मुझे मंदिर और मस्जिद के रसूख़ की कहानी मैं एक मज़दूर हूँ इन हाथों ने पता नहीं कितने अल्लाह के ठिकाने बनाये होगे ।।